- मन की बात में जल संरक्षण को मिला प्रमुख स्थान, डॉ. ए.के. द्विवेदी ने प्रधानमंत्री का जताया आभार
- परीक्षा सुधार के साथ शिक्षा को भी रोजगारोन्मुखी बनाना होगा
- Madhuri Dixit in Dil To Pagal Hai to Sridevi in Mr. India: Actresses Who Delivered Memorable Rain Dance Sequences in Films
- विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर विशेषज्ञों ने बढ़ते साइलेंट लिवर डैमेज को लेकर दी चेतावनी, जागरूकता और बचाव पर दिया जोर
- Bhumi Satish Pednekkar Joins Rishab Shetty in The Pride of Bharat: Chhatrapati Shivaji Maharaj as the Fierce Warrior Queen Belawadi Mallamma
संकोच करने से रोग दूर नहीं होते: डॉ. दीक्षा
इन्दौर. मनीपाल विश्वविद्यालय, कर्नाटक की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा पाण्डेय ने आज यहाँ योग एवं नेचुरोपैथी अस्पताल में हेल्थ एण्ड वेलनेस विषय पर आयोजित वर्कशॉप को सम्बोधित करते हुए महिलाएवं पुरुषां के उन रोगों पर प्रकाश डाला जिन पर आमतौर पर लोग चर्चा नहीं करते अथवा संकोच करते हैं.
वर्कशॉप में डॉ. दीक्षा पाण्डेय ने बताया कि हमें उन बीमारियां के बारे में ज्यादा बात करने की आवश्यकता है, जिसके बारे में लोग ज्यादा बातें नहीं करते हैं, छुपाते हैं. आपने आगे कहा कि, सेक्स से सम्बन्धित जो भी बीमारी होती है, उसके लिए लोग डॉक्टर से चर्चा करने के बजाय सीधे मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लेते हैं. यार-दोस्तों से भी सलाह लेकर कई तरह की गलत दवाईयों का प्रयोग कर लेते हैं. गूगल पर खोजते रहते हैं. इससे उनकी बीमारी और अधिक बढ़ती जाती है तथा भयावहरूप ले लेती है. यदि हमें सर्दी-जुकाम, बुखार या वायरल बीमारी या दस्त लग जाता है तो हम तुरन्त ही नींबू पानी व ओ.आर.एस. का घोल तथा घरेलू उपचार लेने के साथ-साथ तुरन्त ही डॉक्टर को दिखाने मेंभी देरी नहीं करते हैं. उसी तरह यौन रोग सम्बन्धी बीमारियों को भी अतिशीघ्र दिखाना चाहिए. उन्होंने महिला व पुरुष दोनोंं को ही सेक्स सम्बन्धित बीमारी पर डॉक्टर से खुलकर चर्चा करने की बात कही तथा यह भी कहा कि, हमें स्वस्थ्य रहने के लिए हमारे सोच को बदलना चाहिए. स्वस्थ रहने का मतलब है शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा सेक्सुअली स्वस्थ होना. जब हम सेक्स को बहुत लम्बे समय तक अवाइड करेंगे तो उसके कारण हमारे मन में कई तरह के विकार पैदा होने लगते हैं और हमारे अन्दर चिड़ा-चिड़ापन व द्वेष की भावना पैदा होने लगती है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. ए.के. द्विवेदी ने कहा कि, मानसिक, शारीरिक, सामाजिक, आर्थिक तथा लैंगिक रूप से जब हम स्वस्थ रहेंगे तभी पूर्णरूप से स्वस्थ होंगे, आज जिस तरीके से लोग लैंगिक रूप से बीमार हो रहे हैं और उनकी कामुक क्षमता पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं, जिसके कारण कम उम्र की बच्चियों के साथ भी अमानविक कृत्य हो रहे हैं, ऐसे लोगों को योग की शरण में आना चाहिये. यौगिक क्रियाओं को अपनाकर हम मानसिक, शारीरिक, सामाजिक, आर्थिक तथा लैंगिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं. संचालन डॉ. भूपेन्द्र गौतम ने किया। विशेष अतिथि डॉ. संगीता पानेरी तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. ज्योति सिमलोट थीं.


